आज देश में जब भी अनुशासन, देशभक्ति और युवा नेतृत्व की बात होती है, एक नाम सबसे आगे आता है – NCC। नेशनल कैडेट कॉर्प्स की शुरुआत 1948 में हुई थी, आज़ादी के ठीक बाद। मकसद था युवाओं को ऐसा प्लेटफॉर्म देना, जहां वे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनें और देश के लिए तैयार रह सकें। 77 साल बाद भी NCC उसी ऊर्जा के साथ देश के युवाओं को फौलाद बना रहा है।
लेकिन NCC की कहानी 1948 से शुरू नहीं होती। इसकी जड़ें दुनिया में 1666 तक जाती हैं, जब जर्मनी में पहली बार कैडेट ट्रेनिंग की अवधारणा शुरू हुई। भारत में यह विचार प्रथम विश्व युद्ध के दौरान आया, जब 1917 में इंडियन डिफेंस एक्ट के तहत यूनिवर्सिटी कॉर्प्स बनाई गई, जिसमें कॉलेज छात्रों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था। 1920 में यह ढांचा बदलकर यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग कॉर्प्स बना और 1942 में इसका नाम यूनिवर्सिटी ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स कर दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध में इसका असर सीमित रहा, जिसके बाद 1946 में आई H.N. कुंजुरु कमेटी ने सुझाव दिया कि देश को एक एकीकृत युवा संगठन की जरूरत है। इसी रिपोर्ट के आधार पर 1948 में NCC एक्ट बना और आधुनिक NCC की स्थापना हुई। 1949 में गर्ल्स डिविजन जोड़ी गई, ताकि लड़कियों को भी बराबर अवसर मिल सके। उस दौर में यह बड़ा सामाजिक बदलाव माना गया।
आज NCC का मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है और आर्मी, नेवी और एयरफोर्स तीनों शाखाओं में संचालित होता है। पूरी कमान एक डायरेक्टर जनरल के हाथ में रहती है, जो सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं। वर्तमान में लेफ्टिनेंट जनरल विनोद स्कंदा इसका नेतृत्व कर रहे हैं।
NCC सिर्फ वर्दी पहनकर परेड करने वाला संगठन नहीं है। इसके कैडेट राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल, सामाजिक सेवा, राहत और बचाव कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई देने वाला अनुशासन, NCC का ही प्रतीक है। 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्धों में NCC कैडेटों ने सेना का सहयोग किया, महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा, संचार और लॉजिस्टिक सपोर्ट संभाला।
आज देशभर में 14 से 15 लाख कैडेट NCC का हिस्सा हैं, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा यूनिफॉर्मधारी युवा संगठन बन गया है। शहरों, कस्बों और गांवों तक NCC युवाओं में नेतृत्व, टीमवर्क और जिम्मेदारी की भावना पैदा कर रहा है। NCC की A, B और C सर्टिफिकेट युवाओं को सेना में भर्ती और करियर के अवसरों में भी मदद करती हैं।
हाल ही में रक्षा राज्य मंत्री ने घोषणा की है कि देश में 3 लाख नए कैडेट जोड़े जाएंगे। इसका मतलब है कि NCC अब और ज्यादा युवाओं तक पहुंचेगा। सरकार का मानना है कि जितना मजबूत युवाओं का चरित्र और अनुशासन होगा, उतना मजबूत देश भी होगा।
77 साल से NCC सिर्फ सैन्य प्रशिक्षण नहीं दे रहा, बल्कि युवाओं में सोच, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना पैदा कर रहा है। यही कारण है कि इसे आज भी भारत का सबसे भरोसेमंद युवा मंच माना जाता है, जो आने वाली पीढ़ी को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


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