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हम भारत के लोग, लेकिन दबाव अमेरिका का? भारतीय नीतियों में बाहरी असर की बहस

हम भारत के लोग, लेकिन दबाव अमेरिका का? भारतीय नीतियों में बाहरी असर की बहस

एडिटोरियल/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। भारत की राजनीति और नीतियों पर चर्चा जब भी होती है, एक सवाल अक्सर सामने आता है कि क्या भारत वास्तव में पूरी तरह स्वतंत्र नीति-निर्माण करता है या फिर वैश्विक शक्तियों का दबाव इसमें कहीं न कहीं भूमिका निभाता है। हाल के वर्षों में यह सवाल विशेष रूप से तब उठने लगा...

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“जीने का अधिकार” से “गरिमा के साथ मरने का अधिकार” तक: इच्छामृत्यु पर बदलती सोच

“जीने का अधिकार” से “गरिमा के साथ मरने का अधिकार” तक: इच्छामृत्यु पर बदलती सोच

लाइफस्टाइल/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। आधुनिक चिकित्सा ने इंसान की उम्र बढ़ा दी है, लेकिन इसके साथ एक कठिन नैतिक प्रश्न भी सामने आया है। जब किसी व्यक्ति के ठीक होने की कोई उम्मीद न हो और वह लंबे समय तक असहनीय पीड़ा में जीवन से जूझ रहा हो, तो क्या उसे गरिमा के साथ मृत्यु चुनने का...

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हिंदू नहीं रहेगा तो……. मोहन भगवत का बयान; लेकिन क्या ख़त्म हो सकता है हिन्दू धर्म?

हिंदू नहीं रहेगा तो……. मोहन भगवत का बयान; लेकिन क्या ख़त्म हो सकता है हिन्दू धर्म?

नई दिल्ली/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। आरएसएस चीफ मोहन भागवत के हालिया बयान ने एक बार फिर से हिंदू समाज की पहचान और उसकी सामाजिक स्थिति पर व्यापक बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा है, “अगर हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी,” और इस धर्म की स्थिरता और पहचान को “ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य” बताया। भागवत ने भारतीय...