एडिटोरियल/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। भारत की राजनीति और नीतियों पर चर्चा जब भी होती है, एक सवाल अक्सर सामने आता है कि क्या भारत वास्तव में पूरी तरह स्वतंत्र नीति-निर्माण करता है या फिर वैश्विक शक्तियों का दबाव इसमें कहीं न कहीं भूमिका निभाता है। हाल के वर्षों में यह सवाल विशेष रूप से तब उठने लगा...
फ़्लैश ख़बर:
ईरान-इज़राइल टकराव गहराया, क्या पश्चिम एशिया युद्ध के करीब?
एक बयान, दो दिग्गज और सोशल मीडिया की बहस: कोहली की पसंद पर क्यों मचा विवाद
रसोई की आग और वैश्विक तनाव के बीच: एलपीजी आपूर्ति पर उठते नए सवाल
नौकरी के सपने से साइबर गुलामी तक: दक्षिण-पूर्व एशिया में फैले स्कैम नेटवर्क की कहानी
अंतरिक्ष में छुट्टियों का सपना: स्पेस होटल की योजना से खुलती नई संभावनाएं
समुद्र में ताकत का प्रदर्शन: ईरान तनाव के बीच एयरक्राफ्ट कैरियर क्यों बनते हैं युद्ध का निर्णायक हथियार
‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ से 17 साल बाद भी रॉयल्टी: अनिल कपूर की कहानी और फिल्म इंडस्ट्री का बदलता मॉडल
खिताब के बाद कप्तान से दूरी: क्या केकेआर ने श्रेयस अय्यर को जाने देकर खुद ही बदल दी अपनी टीम की दिशा?
रिकॉर्डों की दौड़ में नई चुनौती: क्या ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ तोड़ पाएगी बाहुबली और दंगल जैसे बड़े आंकड़े?
लाइव सिंगिंग बनाम लिप-सिंकिंग: अरिजीत सिंह के ब्रेक पर श्रेया घोषाल की टिप्पणी से क्यों छिड़ी नई बहस
जंगलों के बीच रग्बी का सपना: ओडिशा की आदिवासी लड़कियाँ कैसे बदल रही हैं अपनी जिंदगी की दिशा
मार्च की शुरुआत में ही क्यों तपने लगा देश? मौसम की बदलती चाल का संकेत
आईपीएल 2026: 84 मैचों का बड़ा सीजन, टिकट बुकिंग से लेकर नए फॉर्मेट तक समझिए पूरा खेल
पाकिस्तानी खिलाड़ी की एंट्री से सोशल मीडिया का तूफ़ान: आखिर क्यों सस्पेंड हुआ सनराइजर्स लीड्स का एक्स अकाउंट
हम भारत के लोग, लेकिन दबाव अमेरिका का? भारतीय नीतियों में बाहरी असर की बहस
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पाकिस्तान ने काबुल और कंधार पर क्यों किए हवाई हमले? आखिर क्यों लड़ रहे दो मुस्लिम बाहुल्य देश
“जीने का अधिकार” से “गरिमा के साथ मरने का अधिकार” तक: इच्छामृत्यु पर बदलती सोच
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“जीने का अधिकार” से “गरिमा के साथ मरने का अधिकार” तक: इच्छामृत्यु पर बदलती सोच
लाइफस्टाइल/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। आधुनिक चिकित्सा ने इंसान की उम्र बढ़ा दी है, लेकिन इसके साथ एक कठिन नैतिक प्रश्न भी सामने आया है। जब किसी व्यक्ति के ठीक होने की कोई उम्मीद न हो और वह लंबे समय तक असहनीय पीड़ा में जीवन से जूझ रहा हो, तो क्या उसे गरिमा के साथ मृत्यु चुनने का...
हिंदू नहीं रहेगा तो……. मोहन भगवत का बयान; लेकिन क्या ख़त्म हो सकता है हिन्दू धर्म?
नई दिल्ली/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। आरएसएस चीफ मोहन भागवत के हालिया बयान ने एक बार फिर से हिंदू समाज की पहचान और उसकी सामाजिक स्थिति पर व्यापक बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा है, “अगर हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी,” और इस धर्म की स्थिरता और पहचान को “ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य” बताया। भागवत ने भारतीय...
Importance of Dialogue and Consensus in Democracy—A Reflection on the Current Political Climate
Democracy thrives on diversity, dialogue, and consensus. But political polarization, ideological clashes, and rising bitterness have weakened dialogue culture.




