25 नवम्बर 1960: भारत में पहली बार हुई STD कॉल, इससे पहले कैसे होती थी फोन पर बात?
25 नवंबर 1960… भारत के दूरसंचार इतिहास में यह तारीख़ एक बड़े बदलाव का प्रतीक बनी। कानपुर से लखनऊ के बीच पहली बार Subscriber Trunk Dialling यानी STD कॉल सफलतापूर्वक की गई। पहली बार किसी व्यक्ति ने बिना ऑपरेटर की मदद के खुद नंबर डायल किया और दूसरी शहर में मौजूद व्यक्ति से सीधे बात की। यही वह पल था, जब भारत में टेलीफोन बातचीत का ढंग बदल गया और एक नए तकनीकी दौर की शुरुआत हुई।
इससे पहले स्थिति बिल्कुल अलग थी। लंबी दूरी पर किसी से बात करने के लिए कॉल करने वाले को पहले ऑपरेटर को फोन करना पड़ता था। ऑपरेटर मैन्युअली तार जोड़कर कॉल कनेक्ट करता था। कई बार व्यस्त नेटवर्क, गलत कनेक्शन या तकनीकी दिक्कतों की वजह से कॉल लगने में काफी समय लगता था, और कभी-कभी घंटों इंतजार करना पड़ता था। कॉलिंग धीमी, असुविधाजनक और भरोसेमंद नहीं थी।
STD तकनीक ने इस पूरी प्रक्रिया को बदल दिया। उपयोगकर्ता अब सीधे नंबर डायल कर सकते थे, बिना किसी मध्यस्थ के। इस बदलाव के पीछे भारतीय दूरसंचार विभाग के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम थी, जिन्होंने इलेक्ट्रो-मैकेनिकल स्विचिंग तकनीक और भूमिगत केबल नेटवर्क विकसित किया। यह परियोजना उस दौर में भारत के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी गई, जिसने आगे चलकर देशभर के टेलीफोन नेटवर्क के विस्तार का रास्ता खोला।
दुनिया में यह तकनीक भारत से बहुत पहले आ चुकी थी। सबसे पहला स्वचालित टेलीफोन कॉल 10 जनवरी 1915 को अमेरिका में किया गया था। कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम सोल्टन पी. गिल्बर्ट था, जिन्होंने पेंसिल्वेनिया के हॉली-हिल से पिट्सबर्ग में अपने सहयोगी को कॉल किया। कहा जाता है कि उन्होंने उत्साहित होकर पूछा था—“क्या आप सुन पा रहे हैं? यह ऑटोमेटिक टेलीफोन कॉल है।” यह क्षण दूरसंचार जगत में क्रांतिकारी माना गया, क्योंकि पहली बार लोग किसी ऑपरेटर के बिना बात कर पा रहे थे।
स्वचालित दूरसंचार प्रणाली यानी STD सेवा की शुरुआत दुनिया में 1919 में ब्रिटेन में हुई। इसके बाद 1920 के दशक में अमेरिकी कंपनी बेल टेलीफोन ने स्वचालित नेटवर्क विकसित किया और 1951 में न्यूयॉर्क में पहला स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित हुआ। 1950 और 1960 के दशक में यह तकनीक तेजी से फैली और वैश्विक संचार पूरी तरह बदल गया।
भारत ने 1960 में कानपुर-लखनऊ कॉल के साथ इस वैश्विक क्रांति में कदम रखा। हालांकि दुनिया में यह विकास लगभग 45 साल पहले शुरू हो चुका था, लेकिन भारत में इसका सफल उपयोग दूरसंचार के आधुनिक दौर की शुरुआत माना गया। धीरे-धीरे यह सेवा देशभर में फैल गई और आज के डिजिटल और मोबाइल युग की आधारशिला बनी।
STD ने न सिर्फ कॉलिंग को तेज और आसान बनाया, बल्कि लोगों के बीच दूरी कम की, व्यापार बढ़ाया और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में बड़ी भूमिका निभाई। आज मोबाइल फोन, इंटरनेट कॉलिंग और वीडियो चैट आम हैं, लेकिन इन सबकी बुनियाद उसी तकनीकी कदम से रखी गई, जब भारत ने पहली बार बिना ऑपरेटर के लंबी दूरी की कॉल की।
1960 की वह कॉल सिर्फ एक बातचीत नहीं थी। वह भारत की संचार व्यवस्था के आधुनिक बनने की शुरुआत थी, जिसने देश को जोड़ने का तरीका हमेशा के लिए बदल दिया।


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