पटना/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के अगले ही दिन, शुक्रवार को बिहार सरकार ने विभागों का बंटवारा जारी कर दिया। इस बार सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि 20 वर्षों में पहली बार मुख्यमंत्री ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अब डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को सौंपी गई है, जो राज्य की कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा का नेतृत्व करेंगे।
विभाग बंटवारे के बाद सबसे अधिक चर्चा चिराग पासवान को लेकर है। उनकी पार्टी लोजपा (रामविलास) को कैबिनेट में दो मंत्री पद मिले हैं, लेकिन उप मुख्यमंत्री का पद उन्हें एक बार फिर नहीं मिला। चिराग ने कहा कि वे “लालची” नहीं दिखना चाहते और जनता के बीच जाकर अपना काम आगे बढ़ाएंगे। उनकी यह प्रतिक्रिया उन्हें महाभारत के भीष्म पितामह की उस भूमिका जैसी स्थिति में खड़ा करती है जहां संयम, वचनबद्धता और नियंत्रण में रहकर आगे बढ़ना प्रमुख होता है।
इस विभाग बंटवारे में वरिष्ठता, अनुभव, गठबंधन समीकरण और क्षेत्रीय-जातीय संतुलन का स्पष्ट ध्यान रखा गया है। अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि क्या यह संतुलन चिराग की भविष्य की भूमिका को आकार दे रहा है या उनके राजनीतिक प्रभाव को नियंत्रित करने की रणनीति है।
गृह विभाग छोड़ना, नए चेहरों को जिम्मेदारी देना और सहयोगी दलों को सीमित हिस्सेदारी देना यह संकेत करता है कि नीतीश सरकार अपनी पिच रणनीतिक रूप से मजबूत कर रही है। यह फैसला दर्शाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब भी सत्ता संतुलन के केंद्र बिंदु बने हुए हैं।
अंत में, सम्राट चौधरी को सुरक्षा की कमान मिल चुकी है, नीतीश कुमार नई रणनीति के केंद्र में खड़े हैं और चिराग पासवान भीष्म पितामह की तरह संयमित मुद्रा में राजनीतिक रणभूमि में मौजूद हैं। बिहार की नई राजनीतिक कहानी यहीं से आगे बढ़ती है।


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