नेशनल/अनबायस्ड स्ट्रिंगर्स। भारत में मार्च का महीना आमतौर पर उस मौसम का प्रतीक माना जाता है जब सर्दी धीरे-धीरे विदा लेती है और गर्मी की शुरुआत महसूस होती है। लेकिन इस साल तस्वीर कुछ अलग है। मार्च का पहला सप्ताह खत्म होने से पहले ही देश के कई हिस्सों में तापमान अचानक तेज़ी से बढ़ गया है। उत्तर और पश्चिम भारत के कई इलाकों में तापमान सामान्य से 8 से 13 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज किया गया, जो मौसम वैज्ञानिकों के लिए भी चिंता का विषय बन रहा है।
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि गर्मी जल्दी आ गई है। असली सवाल यह है कि क्या यह केवल एक अस्थायी मौसमीय घटना है या फिर जलवायु के बदलते पैटर्न का संकेत है। क्योंकि मौसम की यह असामान्य तेजी अब केवल तापमान का आंकड़ा नहीं रह गई, बल्कि यह कृषि, स्वास्थ्य और शहरों की जीवनशैली तक को प्रभावित कर सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत के कई शहरों में मार्च की शुरुआत में ही तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और मध्य भारत के कई हिस्सों में गर्म हवाओं ने मौसम को अचानक बदल दिया है। कुछ इलाकों में तो तापमान इतना तेजी से बढ़ा कि लोगों को मार्च के बजाय मई-जून जैसी गर्मी महसूस होने लगी।
मौसम वैज्ञानिक इस अचानक बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण बताते हैं और वह है पश्चिमी विक्षोभ की कमी। सामान्य तौर पर सर्दियों के अंत और वसंत के शुरुआती दिनों में पश्चिमी विक्षोभ नाम की मौसम प्रणाली उत्तर भारत में बादल, बारिश और ठंडी हवाएं लाती है। लेकिन इस बार ये सिस्टम कमजोर या लगभग अनुपस्थित रहे। परिणाम यह हुआ कि आसमान साफ रहा, सूरज की किरणें सीधे जमीन तक पहुंचीं और तापमान तेजी से बढ़ गया।
इसके साथ ही शुष्क हवाओं ने भी तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उत्तर-पश्चिम भारत में चल रही सूखी हवाओं ने न केवल दिन का तापमान बढ़ाया बल्कि रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर बनाए रखा। जब रातें ठंडी नहीं होतीं तो दिन की गर्मी जल्दी कम नहीं होती और धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में गर्मी का प्रभाव बढ़ने लगता है।
दिल्ली और आसपास के इलाकों में इसका असर साफ देखा गया है। कई दिनों तक लगातार तापमान 35 डिग्री से ऊपर बना रहा और कुछ जगहों पर 37 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सामान्य मार्च के तापमान से काफी ज्यादा है और इस वजह से लोगों को मौसम में असामान्य बदलाव महसूस हो रहा है।
मौसम विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस तरह की घटनाएं पूरी तरह नई नहीं हैं, लेकिन इनकी आवृत्ति बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में मार्च और अप्रैल के महीनों में जल्दी हीटवेव जैसी स्थिति बनने लगी है। यही कारण है कि मौसम विभाग ने पहले ही संकेत दिया था कि इस साल मार्च से मई के बीच कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
इस बदलते मौसम का असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहता। जल्दी बढ़ती गर्मी का असर खेतों में खड़ी फसलों पर भी पड़ता है। गेहूं जैसी रबी की फसलें जब पकने के दौर में होती हैं, उस समय अचानक बढ़ी गर्मी उनके उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा शहरों में पानी की मांग, बिजली की खपत और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
मौसम की यह स्थिति हमें एक बड़े सवाल की ओर भी ले जाती है। क्या हम सिर्फ हर साल रिकॉर्ड तापमान की खबरें पढ़ते रहेंगे, या फिर यह समझने की कोशिश करेंगे कि बदलती जलवायु हमारे जीवन और अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जा रही है।
मार्च की यह अचानक आई गर्मी शायद सिर्फ मौसम की खबर नहीं है। यह उस बदलती जलवायु की झलक भी हो सकती है, जो आने वाले वर्षों में भारत के मौसम को और ज्यादा अनिश्चित बनाने वाली है। सवाल यही है कि क्या हम इसे केवल एक गर्म दिन मानकर भूल जाएंगे, या इसे भविष्य के संकेत की तरह समझेंगे।


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